Friday, December 28, 2018

अगस्ता डील पर मिशेल की चिट्ठी से खुलासा- मनमोहन पर था कांग्रेस का दबाव

अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर सौदे मामले में गिरफ्तार किए गए क्रिश्चियन जेम्स मिशेल की एक चिट्ठी सामने आई है जो कई तरह के खुलासे करती है. ये चिट्ठी फिनमेकैनिका कंपनी के CEO जुगेपी ओरसी को लिखी गई थी, जिसमें कहा गया है कि उन्होंने सत्ताधारी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर दबाव बनवाया था. इसमें ये भी खुलासा हुआ है कि इस डील से जुड़ी सभी जानकारी मिशेल को संबंधित मंत्रालयों से मिल रही थी.

28 अगस्त, 2009 को लिखी गई इस चिट्ठी के अनुसार, मिशेल को अगस्ता वेस्टलैंड डील से जुड़ी सभी जानकारियां प्रधानमंत्री कार्यालय, रक्षा मंत्रालय समेत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से मिल रही थी. इतना ही नहीं उसे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन की मुलाकात के बारे में भी पता था.

जुगेपी ओरसी को लिखी चिट्ठी में मिशेल ने दावा किया है कि इस मुद्दे को लेकर सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी की जो बैठक होने वाली है उसके बारे में उसे जानकारी है. इस मसले पर प्रधानमंत्री, ज्वॉइंट सेकेट्ररी और डिफेंस सेकेट्ररी के बीच में जो बात चल रही है वह उसे भी पता है. इतना ही नहीं तत्कालीन रक्षा मंत्री उनकी डील के पक्ष में हैं.

आपको बता दें कि लंबी कोशिशों के बाद इस डील के बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल को यूएई से प्रत्यापित कर भारत लाया गया था. मिशेल को राजधानी दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया था, तभी से वह सीबीआई की कस्टडी में है.

गौरतलब है कि 2012 में बिचौलिये क्रिश्चियन मिशेल का नाम अगस्ता वेस्टलैंड के पक्ष में सौदा कराने और भारतीय अधिकारियों को अनुचित तरीके से लाभ पहुंचाने वाले 3 बिचौलियों में से एक के रूप में सामने आया था. अन्य 2 बिचौलियों के नाम राल्फ गिडो हैस्के और कार्लो गेरोसा है. यह पूरा सौदा करीब 3,600 करोड़ रुपये का था.

पुलिस की मानें तो आरोपियों ने इंस्पेक्टर सुबोध को घेर लिया था. कलुआ ने उनके सिर पर कुल्हाड़ी से वार किया था. जबकि उसके अन्य साथी उन पर पत्थर बरसा रहे थे. पुलिस के मुताबिक इसी दौरान प्रशांत नट ने इंस्पेक्टर की पिस्टल छीनकर उन्हें गोली मार दी थी. इससे पहले इंस्पेक्टर ने आत्मरक्षा में गोली चलाई थी, जो सुमित नामक युवत को लगी थी. जिससे उसकी मौत हो गई थी.

बताते चलें कि इस मामले में अभी तक बुलन्दशहर पुलिस ने 22 लोगों को गिरफ्तार किया है. जबकि आधा दर्जन से ज्यागा आरोपियों ने खुद ही कोर्ट में सरेंडर कर दिया. हैरानी की बात ये है कि पुलिस ने पहले जीतू फौजी को इंस्पेक्टर का हत्यारा माना था. लेकिन जांच के दौरान पुलिस उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं जुटा पाई.

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