कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मंगलवार को लोकसभा चुनाव प्रचार की शुरुआत के लिए राजस्थान पहुंचे. यहां सूरतगढ़ में रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि इस बार चुनाव में दो विचारधाराओं की लड़ाई है. एक तरफ देश बांटने की विचारधारा है तो दूसरी तरफ भाईचारा, प्यार और लोगों को जोड़ने की विचारधारा है. पिछले पांच साल में मोदी दो हिन्दुस्तान बनाने की कोशिश कर रहे हैं. एक प्राइवेट हवाईजहाज वालों का और दूसरा गरीबों, किसानों नौजवानों का है.
मोदी पर निशाना साधते हुए राहुल ने कहा कि लोगों के खाते में 15 लाख नहीं आया, रोजगार छिन गए, गब्बर सिंह टैक्स आ गया. उल्टा मोदी लोगों की जेब से छीनकर पैसे नीरव मोदी जैसों को दे रहे हैं.
मनरेगा पर मोदी ने संसद में भाषण दिया. वहां मोदी ने कहा कि मनरेगा सबसे बेकार योजना है. मोदी कहते हैं कि कांग्रेस पार्टी जनता से गड्ढा खुदवाती है. उन्हें मनरेगा समझ नहीं आई. उन्हें ये भी नहीं पता कि जब यूपीए की सरकार थी, तब मनरेगा ने, भोजन के अधिकार ने, किसान कर्जमाफी ने 14 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला.
जो हमने 10 साल में किया, उस सबको नरेंद्र मोदी ने 5 साल में खत्म कर दिया. और फिर कहते हैं कि मैं चौकीदार हूं. उन्होंने लोगों को ये नहीं बताया कि वे चौकीदार किसके हैं. मोदी अनिल अंबानी, नीरव मोदी के चौकीदार हैं.
राफेल के जरिए राहुल ने एक बार फिर मोदी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार ने राफेल के लिए दो शर्तें रखी थीं. पहली कि ये जहाज हिन्दुस्तान में बनेगा. इसे एचएएल बनाएगी और इसे देश के अलग-अलग हिस्सों में बनाया जाएगा. दूसरी शर्त थी कि 526 करोड़ एक जहाज के लिए दिए जाएंगे.
बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल की रैलियों के दौरान राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत प्रदेश के 11 निर्दलीय विधायकों को कांग्रेस में शामिल होने का ऐलान कर सकते हैं. यह भी माना जा रहा है कि बीजेपी ने जिन विधायकों को लोकसभा का टिकट नहीं दिया है या फिर जिन नेताओं का टिकट कटा है, वे भी कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं. इसी वजह से सोमवार शाम राजस्थान के मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री दिल्ली पहुंचे थे.
बताया जा रहा है कि कांग्रेस ने राजस्थान में होने जा रहे लोकसभा चुनाव के उम्मीदवारों के नामों के ऐलान को भी राहुल गांधी की इन रैलियों की वजह से रोक रखा है. हालांकि, सभी 25 सीटों के लिए नाम तय कर लिए गए हैं. राहुल गांधी की तीनों सभाओं के खत्म होने के बाद उम्मीद है कि कांग्रेस देर रात या कल अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान करेगी. वहीं, बीजेपी ने चार दिन पहले ही अपने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है. साथ ही सभी नेता चुनाव प्रचार में लग गए हैं .
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने तकरीबन एक बजे श्री गंगानगर जिले के सूरतगढ़ में राजीव गांधी स्टेडियम में सभा की. वहां जनता को संबोधित करने के बाद राहुल गांधी 3:30 बजे बूंदी जिले के खेल संकुल ग्राउंड में एक जन संकल्प रैली करेंगे. आखिर में शाम 6:00 बजे जयपुर के रामलीला मैदान में कांग्रेस के शक्ति प्रोजेक्ट से जुड़े बूथ कार्यकर्ताओं से चुनावी चर्चा करेंगे. बता दें कि राहुल गांधी की सभा के बाद कल से कांग्रेस रोजाना 3-3 रैलियां को पूरे राज्य में करेगी. इसी तरह मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट पूरे राज्य में 200 रैलियां करेंगे.
Tuesday, March 26, 2019
Wednesday, March 20, 2019
गंगा यात्रा के बहाने किसे साधने की कोशिश में प्रियंका
लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश की ज़मीन पर कांग्रेस की पकड़ मज़बूत करने के लिए कांग्रेस महासचिव और पू्र्वी यूपी की प्रभारी प्रियंका गांधी तीन दिवसीय पू्र्वांचल दौरे पर हैं.
इस दौरे की शुरुआत उन्होंने संगम नगरी प्रयागराज से की और वो गंगा के रास्ते बोट यात्रा करते हुए वाराणसी पहुंचेगी. इस दौरे पर प्रियंका गांधी जगह-जगह लोगों से संवाद करती और मंदिरों के दर्शन करती चल रही हैं. वह गंगा के तटों पर मौजूद अलग-अलग गांवों में भी जा रही हैं.
यात्रा के पहले दिन वो जहां हनुमान मंदिर में पूरे रीति रिवाज से पूजा करतीं और संगम में त्रिवेणी की आरती उतारी दिखीं तो बीच में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्रों के एक समूह से बात भी उन्होंने बात की.
प्रियंका गांधी की इस यात्रा की शुरुआत होते ही बसपा प्रमुख मायावती ने कांग्रेस को गठबंधन में शामिल होने का भ्रम न फैलाने की चेतावनी दी है तो सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी ये बात दोहराई है. जबकि कुछ समय पहले उन्होंने ही कांग्रेस के गठबंधन में होने की बात कही थी. वहीं, बीजेपी में भी प्रियंका गांधी के यूपी की राजनीति उतरने से बैचेनी देखने को मिली है.
ऐसे में प्रियंका गांधी की ये गंगा यात्रा इतनी महत्वपू्र्ण क्यों है और कांग्रेस इससे क्या हासिल करने वाली है, इन सभी पहलुओं की पड़ताल के लिए बीबीसी संवाददाता संदीप सोनी ने वरिष्ठ पत्रकार अंबिकानंद सहाय से बात की. पढ़ें, उनका नज़रिया:
जिस तरह गंगा, यमुना, रामायण और महाभारत भारतीय संस्कृति के चौखंभे हैं उसी तरह कांग्रेस की ताक़त भी उसके चौखंभों में रही है. कांग्रेस के सुनहरे दिनों में बिहार के समाजवादी नेता कर्पूरी ठाकुर इसे इस तरह परिभाषित करते थे कि महिलाएं, ब्राह्मण, मुसलमान और दलित, कांग्रेस के चौखंभे हैं यानि उसका वोट बैंक हैं.
ये चौखंभे कांग्रेस को सत्ता से हिलने ही नहीं देते थे. इनके कारण उसे कोई हरा नहीं सकता था. इंदिरा गांधी या नेहरू जी के ज़माने में कहा जाता था कि पार्टी अगर कुर्सी टेबल को भी टिकट दे दे, तो वो भी जीत जाएंगे. तो इस बात को समझने की ज़रूरत है कि ये गंगा की राजनीति कोई बिल्कुल नई नहीं है. ये सोची समझी रणनीति है क्योंकि जैसे कांग्रेस के पास से मुस्लिम भाग गए और वो हिंदू विरोधी भी कहलाने लगी तो उस छवि को काटने के लिए लगातार एक गंभीर प्रयास चल रहा है.
मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ की कार्रवाई देख लीजिए. वो गायों के लिए काम कर रहे हैं और पुजारियों का वेतन बढ़ा रहे हैं. गुजरात में राहुल गांधी मंदिर-मंदिर में घूमे थे. इसके बाद उनका जनेऊधारी ब्राह्मण अभियान चला. उससे भी काम नहीं चला तो वो कैलाश पर्वत चले गए और अब बहन प्रियंका गंगा के रास्ते बनारस जा रही हैं. तो बहुत सोची-समझी रणनीति से अपने जनाधार को वापस लाने के लिए कांग्रेस ये सब कर रही है.
2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि मां गंगा ने उन्हें बुलाया है और इस अपील के साथ उन्होंने बनारस से चुनाव लड़ा था. इसकी तुलना में प्रिंयका गांधी की शुरुआत कितनी प्रभावी हो सकती है?
मां गंगा भारतीयों के दिल में बसा हुआ शब्द है. उस वक़्त नरेंद्र मोदी ने बहुत ही भावनात्मक नारा दिया था. पूरे वाराणसी ने उन्हें इस कारण भी स्वीकार किया था कि उन्होंने भरोसा दिलाने की कोशिश की थी कि वह मां गंगा की सेवा करेंगे और गंगा बुलावे पर ही वहां आये हैं. तब ग़रीब से ग़रीब व्यक्ति भी इस बात से प्रभावित हो गया था.
अब प्रियंका गांधी के अभियान के केंद्र में भी मां गंगा है. उनके रणनीतिकारों को ये उम्मीद है कि शायद उनकी भी जनता में स्वीकृति हो जाए. हालांकी, अभी शुरुआत में ही हम ये नहीं कह सकते हैं कि प्रियंका की इस यात्रा का भी वैसा ही कोई चमत्कारिक परिणाम होगा.
दरअसल, मोदी की अपील को समर्थन देने के लिए उनके पास एक बहुत सशक्त संस्थान था. लेकिन, आज कांग्रेस का वहां कोई संस्थान नहीं है या न के बराबर है. इसलिए आज मायावती का भी ये बयान आया.
दूसरे दल और ख़ुद कांग्रेस ये जानती है कि अगर कांग्रेस सवर्णों का वोट बांट लेती है तो बीजेपी को नुक़सान होगा और तब ये महागठबंधन ज़ोरदार ढंग से चुनाव अपने पक्ष में ले जा सकता है. लेकिन, अगर वोट पूरी तरह नहीं बंटा तो दिक्क़त आएगी.
मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले दिग्विजय सिंह ने नर्मदा यात्रा निकाली थी और इससे जनाधार और अपने काडर को पुनर्जीवित करने कोशिश की थी. क्या कांग्रेस गंगा यात्रा से भी ऐसा ही कुछ करने की कोशिश में है?
ये उसी रणनीति की कड़ी है. इतना तो मध्य प्रदेश में हो ही गया है कि आज राज्य में कोई कांग्रेस को हिंदू विरोधी नहीं कह सकता है. हिंदू विरोधी छवि से निजात पाने के लिए भी कांग्रेस ये कोशिश कर रही है.
साथ ही रणनीति का एक हिस्सा ये भी है कि कांग्रेस तुरंत लाभ के बारे में नहीं सोच रही है. जो कांग्रेस यूपी में पूरी तरह ख़त्म हो गई थी वो मेहनत करके उसे जिलाना चाहते हैं ताकि 2022 के विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए पार्टी को मज़बूती दे सकें.
फ़िलहाल कांग्रेस ख़ुद भी किसी चमत्कार की उम्मीद नहीं कर रही है. अभी दो सीट उनके पास है और बहुत जमकर लड़ने पर अगर सात-आठ सीट भी जीत जाते हैं तो ये कांग्रेस की बहुत बड़ी सफलता होगी. इससे ज़्यादा वो सोच भी नहीं रहे हैं.
इस दौरे की शुरुआत उन्होंने संगम नगरी प्रयागराज से की और वो गंगा के रास्ते बोट यात्रा करते हुए वाराणसी पहुंचेगी. इस दौरे पर प्रियंका गांधी जगह-जगह लोगों से संवाद करती और मंदिरों के दर्शन करती चल रही हैं. वह गंगा के तटों पर मौजूद अलग-अलग गांवों में भी जा रही हैं.
यात्रा के पहले दिन वो जहां हनुमान मंदिर में पूरे रीति रिवाज से पूजा करतीं और संगम में त्रिवेणी की आरती उतारी दिखीं तो बीच में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्रों के एक समूह से बात भी उन्होंने बात की.
प्रियंका गांधी की इस यात्रा की शुरुआत होते ही बसपा प्रमुख मायावती ने कांग्रेस को गठबंधन में शामिल होने का भ्रम न फैलाने की चेतावनी दी है तो सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी ये बात दोहराई है. जबकि कुछ समय पहले उन्होंने ही कांग्रेस के गठबंधन में होने की बात कही थी. वहीं, बीजेपी में भी प्रियंका गांधी के यूपी की राजनीति उतरने से बैचेनी देखने को मिली है.
ऐसे में प्रियंका गांधी की ये गंगा यात्रा इतनी महत्वपू्र्ण क्यों है और कांग्रेस इससे क्या हासिल करने वाली है, इन सभी पहलुओं की पड़ताल के लिए बीबीसी संवाददाता संदीप सोनी ने वरिष्ठ पत्रकार अंबिकानंद सहाय से बात की. पढ़ें, उनका नज़रिया:
जिस तरह गंगा, यमुना, रामायण और महाभारत भारतीय संस्कृति के चौखंभे हैं उसी तरह कांग्रेस की ताक़त भी उसके चौखंभों में रही है. कांग्रेस के सुनहरे दिनों में बिहार के समाजवादी नेता कर्पूरी ठाकुर इसे इस तरह परिभाषित करते थे कि महिलाएं, ब्राह्मण, मुसलमान और दलित, कांग्रेस के चौखंभे हैं यानि उसका वोट बैंक हैं.
ये चौखंभे कांग्रेस को सत्ता से हिलने ही नहीं देते थे. इनके कारण उसे कोई हरा नहीं सकता था. इंदिरा गांधी या नेहरू जी के ज़माने में कहा जाता था कि पार्टी अगर कुर्सी टेबल को भी टिकट दे दे, तो वो भी जीत जाएंगे. तो इस बात को समझने की ज़रूरत है कि ये गंगा की राजनीति कोई बिल्कुल नई नहीं है. ये सोची समझी रणनीति है क्योंकि जैसे कांग्रेस के पास से मुस्लिम भाग गए और वो हिंदू विरोधी भी कहलाने लगी तो उस छवि को काटने के लिए लगातार एक गंभीर प्रयास चल रहा है.
मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ की कार्रवाई देख लीजिए. वो गायों के लिए काम कर रहे हैं और पुजारियों का वेतन बढ़ा रहे हैं. गुजरात में राहुल गांधी मंदिर-मंदिर में घूमे थे. इसके बाद उनका जनेऊधारी ब्राह्मण अभियान चला. उससे भी काम नहीं चला तो वो कैलाश पर्वत चले गए और अब बहन प्रियंका गंगा के रास्ते बनारस जा रही हैं. तो बहुत सोची-समझी रणनीति से अपने जनाधार को वापस लाने के लिए कांग्रेस ये सब कर रही है.
2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि मां गंगा ने उन्हें बुलाया है और इस अपील के साथ उन्होंने बनारस से चुनाव लड़ा था. इसकी तुलना में प्रिंयका गांधी की शुरुआत कितनी प्रभावी हो सकती है?
मां गंगा भारतीयों के दिल में बसा हुआ शब्द है. उस वक़्त नरेंद्र मोदी ने बहुत ही भावनात्मक नारा दिया था. पूरे वाराणसी ने उन्हें इस कारण भी स्वीकार किया था कि उन्होंने भरोसा दिलाने की कोशिश की थी कि वह मां गंगा की सेवा करेंगे और गंगा बुलावे पर ही वहां आये हैं. तब ग़रीब से ग़रीब व्यक्ति भी इस बात से प्रभावित हो गया था.
अब प्रियंका गांधी के अभियान के केंद्र में भी मां गंगा है. उनके रणनीतिकारों को ये उम्मीद है कि शायद उनकी भी जनता में स्वीकृति हो जाए. हालांकी, अभी शुरुआत में ही हम ये नहीं कह सकते हैं कि प्रियंका की इस यात्रा का भी वैसा ही कोई चमत्कारिक परिणाम होगा.
दरअसल, मोदी की अपील को समर्थन देने के लिए उनके पास एक बहुत सशक्त संस्थान था. लेकिन, आज कांग्रेस का वहां कोई संस्थान नहीं है या न के बराबर है. इसलिए आज मायावती का भी ये बयान आया.
दूसरे दल और ख़ुद कांग्रेस ये जानती है कि अगर कांग्रेस सवर्णों का वोट बांट लेती है तो बीजेपी को नुक़सान होगा और तब ये महागठबंधन ज़ोरदार ढंग से चुनाव अपने पक्ष में ले जा सकता है. लेकिन, अगर वोट पूरी तरह नहीं बंटा तो दिक्क़त आएगी.
मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले दिग्विजय सिंह ने नर्मदा यात्रा निकाली थी और इससे जनाधार और अपने काडर को पुनर्जीवित करने कोशिश की थी. क्या कांग्रेस गंगा यात्रा से भी ऐसा ही कुछ करने की कोशिश में है?
ये उसी रणनीति की कड़ी है. इतना तो मध्य प्रदेश में हो ही गया है कि आज राज्य में कोई कांग्रेस को हिंदू विरोधी नहीं कह सकता है. हिंदू विरोधी छवि से निजात पाने के लिए भी कांग्रेस ये कोशिश कर रही है.
साथ ही रणनीति का एक हिस्सा ये भी है कि कांग्रेस तुरंत लाभ के बारे में नहीं सोच रही है. जो कांग्रेस यूपी में पूरी तरह ख़त्म हो गई थी वो मेहनत करके उसे जिलाना चाहते हैं ताकि 2022 के विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए पार्टी को मज़बूती दे सकें.
फ़िलहाल कांग्रेस ख़ुद भी किसी चमत्कार की उम्मीद नहीं कर रही है. अभी दो सीट उनके पास है और बहुत जमकर लड़ने पर अगर सात-आठ सीट भी जीत जाते हैं तो ये कांग्रेस की बहुत बड़ी सफलता होगी. इससे ज़्यादा वो सोच भी नहीं रहे हैं.
Friday, March 8, 2019
अगवा लड़कियों को छुड़ाने गई थी पुलिस, ग्रामीणों ने किया हमला, SHO की टांग टूटी
बिहार के गया जिले में 2 लड़कियो को अगाव कर उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया. जब परिजनों की शिकायत पर पुलिस लड़कियों को मुक्त कराने के लिए एक गांव में पहुंची तो वहां ग्रामीणों ने पुलिस पर हमला कर दिया. यही नहीं इस हमले में थाना प्रभारी की टांग टूट गई. हालांकि पुलिस ने लड़कियों को मुक्त करा लिया. लेकिन आरोपी अभी तक फरार हैं.
मामला गया के अतरी थाना क्षेत्र का है. जहां एक गांव से दो लड़कियों को कुछ दबंगों ने अगवा कर लिया था. वे लड़कियों को एक सुनसान जगह पर ले गए और वहां उनके साथ बलात्कार किया. इस घटना की सूचना परिजनों ने पुलिस को दी. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश में छापेमारी शुरू की.
तभी पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि गया और नवादा जिले की सीमा पर बसे एक गांव में लड़कियों को बंधक बनाकर रखा गया है. पुलिस सूचना मिलते ही गांव में दबिश देने जा पहुंची. लेकिन उस वक्त पुलिस के पसीने छूट गए, जब ग्रामीणों ने पुलिस पर ही हमला कर दिया.
इस हमले में अतरी के थाना प्रभारी रंजन चौधरी सहित पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए. थाना प्रभारी के पैर की हड्डी टूट गई. लेकिन इस बीच अगवा लड़कियों को पुलिस ने मुक्त करा लिया. लड़कियों ने पुलिस को दिए बयान में सामूहिक बलात्कार की बात कही.
गया के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजीव मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि दोनों अगवा की गई लड़कियों को मुक्त करा लिया गया है. आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एक टीम गठित कर दी गई है. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है.
इस छात्रा को जवाब देते हुए राहुल गांधी ने राफेल में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया. राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने आपके बैंडमिंटन कोर्ट का पैसा छीनकर अनिल अंबानी को दे दिया. राहुल ने छात्रा को समझाते हुए कहा, "कोरापुट में राफेल हवाई जहाज का इंजन बनना था, मगर प्रधानमंत्री ने HAL से कॉन्ट्रैक्ट छीना और अपने मित्र अनिल अंबानी को दे दिया. राहुल ने कहा कि इस डील की वजह से अनिल अंबानी को 30 हजार करोड़ का फायदा हुआ.
कोरापुट लोकसभा सीट: जहां आजादी के बाद 13 बार जीत चुकी है कांग्रेस
राहुल ने कहा कि इतना पैसा हिन्दुस्तान में मनरेगा को एक साल चलाने में लगता है. अनिल अंबानी ने जिंदगी में एक बार भी हवाई जहाज नहीं बनाया. राहुल ने कहा, "प्रधानमंत्री ने आपसे ओडिशा में रोजगार छीना, प्रधानमंत्री ने आपका जो बैडमिंटन कोर्ट है उसका पैसा छीन अनिल अंबानी को दे दिया, यही बात ओडिशा में हो रहा है." राहुल ने कहा कि पिछले 4.5 सालों में पीएम ने अमीरों का 3.5 लाख करोड़ रुपया कर्ज माफ किया है. लेकिन वे किसानों का कर्ज माफ नहीं कर रहे हैं.
राहुल ने कहा कि मेहुल चोकसी, नीरव मोदी और विजय माल्या हजारों करोड़ लेकर भाग गए लेकिन सरकार उनका कुछ नहीं कर रही है. उन्होंने लड़कियों से कहा कि अगर आपके पापा लोन लेकर पैसा नहीं चुकाते हैं तो उन्हें पुलिस पकड़कर ले जाएगी. राहुल ने महिलाओं और लड़कियों से आग्रह किया कि वे सक्रिय राजनीति में आएं और इस राजनीति को बदलें.
मामला गया के अतरी थाना क्षेत्र का है. जहां एक गांव से दो लड़कियों को कुछ दबंगों ने अगवा कर लिया था. वे लड़कियों को एक सुनसान जगह पर ले गए और वहां उनके साथ बलात्कार किया. इस घटना की सूचना परिजनों ने पुलिस को दी. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश में छापेमारी शुरू की.
तभी पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि गया और नवादा जिले की सीमा पर बसे एक गांव में लड़कियों को बंधक बनाकर रखा गया है. पुलिस सूचना मिलते ही गांव में दबिश देने जा पहुंची. लेकिन उस वक्त पुलिस के पसीने छूट गए, जब ग्रामीणों ने पुलिस पर ही हमला कर दिया.
इस हमले में अतरी के थाना प्रभारी रंजन चौधरी सहित पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए. थाना प्रभारी के पैर की हड्डी टूट गई. लेकिन इस बीच अगवा लड़कियों को पुलिस ने मुक्त करा लिया. लड़कियों ने पुलिस को दिए बयान में सामूहिक बलात्कार की बात कही.
गया के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजीव मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि दोनों अगवा की गई लड़कियों को मुक्त करा लिया गया है. आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एक टीम गठित कर दी गई है. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है.
इस छात्रा को जवाब देते हुए राहुल गांधी ने राफेल में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया. राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने आपके बैंडमिंटन कोर्ट का पैसा छीनकर अनिल अंबानी को दे दिया. राहुल ने छात्रा को समझाते हुए कहा, "कोरापुट में राफेल हवाई जहाज का इंजन बनना था, मगर प्रधानमंत्री ने HAL से कॉन्ट्रैक्ट छीना और अपने मित्र अनिल अंबानी को दे दिया. राहुल ने कहा कि इस डील की वजह से अनिल अंबानी को 30 हजार करोड़ का फायदा हुआ.
कोरापुट लोकसभा सीट: जहां आजादी के बाद 13 बार जीत चुकी है कांग्रेस
राहुल ने कहा कि इतना पैसा हिन्दुस्तान में मनरेगा को एक साल चलाने में लगता है. अनिल अंबानी ने जिंदगी में एक बार भी हवाई जहाज नहीं बनाया. राहुल ने कहा, "प्रधानमंत्री ने आपसे ओडिशा में रोजगार छीना, प्रधानमंत्री ने आपका जो बैडमिंटन कोर्ट है उसका पैसा छीन अनिल अंबानी को दे दिया, यही बात ओडिशा में हो रहा है." राहुल ने कहा कि पिछले 4.5 सालों में पीएम ने अमीरों का 3.5 लाख करोड़ रुपया कर्ज माफ किया है. लेकिन वे किसानों का कर्ज माफ नहीं कर रहे हैं.
राहुल ने कहा कि मेहुल चोकसी, नीरव मोदी और विजय माल्या हजारों करोड़ लेकर भाग गए लेकिन सरकार उनका कुछ नहीं कर रही है. उन्होंने लड़कियों से कहा कि अगर आपके पापा लोन लेकर पैसा नहीं चुकाते हैं तो उन्हें पुलिस पकड़कर ले जाएगी. राहुल ने महिलाओं और लड़कियों से आग्रह किया कि वे सक्रिय राजनीति में आएं और इस राजनीति को बदलें.
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