श्रीलंका में रविवार को चर्चों और होटलों में हुए आठ बम धमाकों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 310 हो गई है.
मारे गए लोगों के सामूहिक अंतिम संस्कार का पहला चरण मंगलवार को शुरू हो गया. पूरे देश में तीन मिनट का मौन रखा गया और आगे किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए इमरजेंसी लगा दी गई है.
पुलिस के मीडिया विभाग ने बताया है कि 500 लोग घायल हैं.
अधिकारियों का कहना है कि ये बम धमाके किसी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की मदद से कराए गए.
सरकार ने इसके लिए एक स्थानीय जेहादी गुट - नेशनल तौहीद जमात - का नाम लिया है, हालाँकि अब तक किसी ने भी इस हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है.
मामले में अब तक 38 लोग हिरासत में लिए जा चुके हैं. इनमें से 26 लोगों को सीआईडी ने, तीन को आतंकरोधी दस्ते ने और नौ को पुलिस ने गिरफ्तार किया है.
गिरफ़्तार किए गए लोगों में से सिर्फ नौ को अदालत में पेश किया गया है. ये नौ लोग वेल्लमपट्टी की एक ही फ़ैक्ट्री में काम करते हैं.
इससे पहले पुलिस के अनुसार एक चर्च के बाहर एक वैन में विस्फोटकों को निष्क्रिय करते वक़्त उसमें धमाका हो गया. उन्होंने बताया कि ये वैन हमलावरों की थी जिन्होंने एक दिन पहले इस चर्च को निशाना बनाया था. धमाके की आवाज़ के बाद वहाँ मौजूद लोग दहशत में आकर भागने लगे.
इस बीच हमले की पहले से ही चेतावनी मिलने के बाद सरकार की ओर से कोई क़दम न उठाने के आरोपों पर श्रीलंका में हंगामा मचा हुआ है.
राष्ट्रपति सिरीसेना के सलाहकार शिराल लकथिलाका ने बीबीसी से कहा है कि इस बात की जांच होगी कि सरकार की ओर से कोई चूक हुई है या नहीं,
इससे पहले श्रीलंका के एक वरिष्ठ मंत्री रजित सेनारत्ने ने कोलंबो में पत्रकारों से कहा कि अंतरराष्ट्रीय ख़ुफ़िया एजेंसियों ने ऐसे किसी हमले की चेतावनी दी थी मगर ये सूचना प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे तक नहीं पहुँच सकी.
पुलिस के अनुसार अब तक 38 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है मगर अभी ये पता नहीं है कि हमलों के पीछे कौन है.
मृतकों में 38 विदेशी नागरिक हैं. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक इनमें दस भारतीय शामिल हैं.
भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने रविवार को भारत की लक्ष्मी, नारायण चंद्रशेखर और रमेश की मौत की पुष्टि की थी. जबकि केरल के मुख्यमंत्री ने एक अन्य भारतीय नागरिक पीएस रासीना का नाम मृतकों में जोड़ा था.
मामले में गिरफ़्तार किए गए सभी लोग श्रीलंका के ही नागरिक हैं. इन लोगों के किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन से संपर्कों की भी जांच की जा रही है. अभी तक किसी भी संगठन ने इन धमाकों की ज़िम्मेदारी नहीं ली है.
प्रधानमंत्री का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है कि संभावित हमलों के बारे में पुलिस के पास पहले से जानकारी थी लेकिन कैबिनेट को इस बारे में जानकारी नहीं दी गई थी.
हमलों के बाद रविवार को समूचे श्रीलंका में कर्फ्यू लगा दिया गया था, जिसे सोमवार सुबह हटा लिया गया. सोशल मीडिया को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है. सोमवार रात आठ बजे से अगले दिन सुबह चार बजे तक फिर से कर्फ्यू लगाया जाएगा.
श्रीलंका के रक्षामंत्री आर विजयवर्धन का कहना है, ''ये आत्मघाती हमले हैं. ख़ुफ़िया एजेंसियों ने हमले के बारे में सूचित किया था, लेकिन इससे पहले कि उन्हें रोका जाता, धमाके हो गए. हमले की साज़िश विदेश में रची गई.''
नेगोम्बो में एक आदमी ने एएफ़पी को बताया कि सेंट सेबस्टियन चर्च में वो और उनकी पत्नी प्रार्थना में शामिल होने गए थे.
दिलीप फर्नांडो ने कहा, "लेकिन वहां बहुत भीड़ थी. मैं वहां खड़े नहीं रहना चाहता था, इसलिए मैं दूसरे चर्च में चला गया."
लेकिन दिलीप के परिवार के कुछ सदस्य चर्च के अंदर थे, विस्फ़ोट में वो बच गए लेकिन उनका मानना है कि उन्होंने आत्मघाती हमलावर को देखा था.
दिलीप के अनुसार, "प्रार्थना के बाद उन्होंने देखा कि एक युवा भारी बैग के साथ चर्च के अंदर गया. उसने मेरे दादा का सिर भी छुआ. यही हमलावर था."
हमले किसने किए हैं, इसे लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है. पकड़े गए लोगों को लेकर भी कुछ सार्वजनिक नहीं किया गया है.
श्रीलंका के दूरसंचार मंत्री हरिन फर्नांडो ने भी बीबीसी से बातचीत में कहा कि सरकार के पास आज हुए हमलों के बारे में ख़ुफ़िया रिपोर्ट थी.
उन्होंने कहा, "इस ख़ुफ़िया रिपोर्ट के बारे में प्रधानमंत्री को जानकारी नहीं दी गई थी. इस रिपोर्ट को गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया, ये सवाल भी कैबिनेट में उठा है."
उन्होंने बताया, "ख़ुफ़िया रिपोर्ट में कहा गया है कि चार तरह से हमले हो सकते हैं. आत्मघाती बम धमाके हो सकते हैं, हथियारों से हमला हो सकता है, चाकू हमला हो सकता है या विस्फ़ोटकों से लदे ट्रक से हमला हो सकता है. इस रिपोर्ट में कुछ संदिग्धों के नाम का भी ज़िक्र है. उनके टेलिफ़ोन नंबर भी रिपोर्ट में दिए गए थे. ये आश्चर्यजनक है कि ख़ुफ़िया विभाग के पास ये रिपोर्ट थी लेकिन इस बारे में कैबिनेट या प्रधानमंत्री को नहीं पता था."
फ़र्नांडो ने कहा, "ये रिपोर्ट एक दस्तावेज़ है और ये दस्तावेज़ अब हमारे पास है. इस रिपोर्ट में कुछ नामों का भी ज़िक्र है. इसमें कुछ संगठनों के भी नाम हैं. जो मैं सुन रहा हूं उससे पता चल रहा है कि जांच सही चल रही है और हम उन लोगों तक पहुंच जाएंगे जिन्होंने ये हमले किए हैं. हमले के पीछे कौन लोग हैं और कौन समूह हैं उनकी पहचान कर ली गई है. कल शाम तक हमारे पास पूरी जानकारियां होंगी."
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